Saturday, September 22, 2018

सोना कैसे बनता है पूरी जानकारी

सोना कैसे बनता है Gold making formula in hindi. सोने जैसी कीमती धातु को पूरी दुनिया में लोग jewellery use करते है। सबने सोने को देखा है और पता है की सोना कितना महँगा होता है, सोने की क्या वैल्यू है। लेकिन कभी तो आपको question हुआ होगा की यह गोल्ड कहा से निकालता है, गोल्ड बनाने का फार्मूला क्या होगा ? तो आज हम इसी question का answer देने वाले है की सोना कहा से मिलता है और सोना कैसे बनता है। सोना कैसे बनता है पूरी जानकारी
लोगो में सोने की हाई डिमांड होने की वजह से शोधकर्ताओं या metal research team बहुत सी जगहों पर सोने की खोज करने के लिए निकल पड़ते है। यह टीम पहले तो यह चेक करते है की कहा से सोना मिल सकता है, जगह पता चलने के बाद वहा खोदकाम और बहुत सी metal finding process की जाती है तब जाके उन्हें सोना प्राप्त हो पाता है। तो आइये जानते है क्या है वह मेटल प्रोसेस जिससे सोना मिलता है।

सोना कैसे बनता है

  • शुद्ध सोना कैसे बनता है यह जानने से पहले यह जान लीजिये की मिश्र रूप में सोना कहा से प्राप्त होता है। आपको जान कर हैरानी होगी लेकिन सोना अक्सर सड़न से बन जाता है। कुदरत का कुछ ऐसा करिश्मा है की जब भी किसी ख़ास वातावरण वाली जगह पर कुछ सूक्ष्म धातु कणो में ऐसी environmental process हो जाती है की वह सड़ जाते है यानी की ख़राब हो जाते है।
  • सड़ने के बाद सभी धातु मिश्र रूप में किसी एक स्थान पर स्थिर हो जाती है और वहा बन जाता है सोना। जो छोटे छोटे कणो में दूसरी धातु के साथ मिश्र होता है। अब सोने को अलग करने के लिए शोधकर्ताओं की टीम वह अलग अलग प्रोसेस कर के बहुत से तरीके आज़माते है तब जाके अंत में उन्हें शुद्ध सोना प्राप्त हो पाता है।
  • सोना आमतौर पर या तो अकेले या पारे या सिल्वर के साथ मिश्र धातु के रूप में पाया जाता है।  कैलेवराइट, सिल्वेनाइट, पेटजाइट और क्रेनराइट अयस्कों के रूप में भी यह पाया जाता है। अब ज्यादातर स्वर्ण अयस्क या तो खुले गड्डों से आता है या फिर अंडरग्राउंड खानों से निकलता है।
  • स्वर्ण अयस्क से शुद्ध सोना हासिल करने के सभी तरीकों में सबसे पहले चट्टानों से निकले अयस्क को धोया जाता है और फिर उसे शुद्धिकरण की मिल में भेज दिया जाता है। मिल में अयस्क को पानी के साथ छोटे-छोटे कणों में पीस लिया जाता है। इसके बाद अयस्क को पारे की परत चढ़ी हुई प्लेटों से होकर गुजारा जाता है।
  • स्वर्ण और पारा मिलकर अमलगम बना लेते हैं। एक बार अमलगम बन जाने के बाद इसे तब तक गर्म किया जाता है, जब तक कि पारा गैस बनकर उड़ नहीं जाता, इसके बाद बचा रह जाता है सोना।
  • स्वर्ण और पारा से बना अमलगम को गर्म कर के सोना निकाल लिया जाता है और फिर उसके बाद मशीन से सोने को निखारने की प्रक्रिया शुरू होती है।
  • आपने यह तो सुना ही होगा की भाई आज कल बहुत पैसे वाला हो गया है क्या खुद की सोने की खान बना ली है या सोने की खान में काम कर रहा है ? तो दोस्तों सोने की खान का मतलब यही है की चटानो के अंदरि भाग में सोना प्राप्त होने की संभावना होती है।
  • हमारे भारत में बहुत से राज्य में इसी प्रकार से सोना पाया जाता है। भारत में सोने का सब से अधिक उत्पादन कर्णाटक राज्य में होता है।
  • इंटरनेट से मिली माहिती अनुसार सोना निकालने की कुल 7 प्रक्रियाए होती है जिनमे से पहली 4 मानव के हाथो में होती है और बाकी 3 रासायनिक प्रक्रियाए होती है। तो आइये जानते है एक एक प्रक्रिया के बारे में पूरी जानकारी ताकि आपको भी पता चले गोल्ड कहा से निकलता है।

गोल्ड कहा से निकलता है - 7 विधि

Gold making formula in hindi. जब मैंने रिसर्च करना शुरू किया की सोना कैसे बनता है और सोने को कहा से निकाला जाता है तो मुझे यह 7 विधि (प्रक्रिया) जानने को मिली जो आपके साथ शेयर कर रहा हु।
  1. चट्टानों में से सोना निकालना : चट्टानों में भारी मात्रा में विस्फोट कर के भुवि विज्ञानी (geologist) की माहिती अनुसार सोना निकाला जाता है। किस पत्थर को तोडना है इसके जाँच भूविज्ञानी (Geologist) करते हैं और फिर उस चिन्हित चट्टान को डाइनेमाइट की मदद से तोडा जाता है l 300 से 500 मीटर की गहराई से करीब 1 टन पत्थर निकाला जाता है और पूरे दिन में करीब 300 टन मलबा बाहर निकाला जाता है l सोना एक जगह पर जमा या स्थिर नही होता है और यह स्वर्ण अयस्क के रूप में मूव करता रहता है l
  2. पत्थरों पर प्रक्रिया : चट्टान से निकाले गए पत्थरो को मशीनों की सहायता से बारीक कर दिया जाता है या पीस दिया जाता है। इस प्रक्रिया को पूरी करने में लम्बा समय जाता है।
  3. गिला करना और पत्थर निकालना : ऊपर की प्रक्रिया से निकाली हुई बारीकी को बालू कहते है। अब बालू में पानी डाला जाता है और फिर इसको एक टेबल पर डाला जाता है जिस पर गीला कम्बलनुमा कपडा बिछा रहता है l जब गीले कण इस कम्बल की ऊपर से निकलते हैं तो सोने के कण इस कम्बल में चिपक जाते हैं और फालतू का पत्थर बाहर निकल जाता है। यह प्रकिया कई बार दोहराई जाती है और इस तरह सोना बहार निकाला जाता है।
  4. मिश्रित पानी से सोना निकालना : पानी में कम्बल धोने से सोने के कण अलग हो जाते हैंl सोना मिश्रित इस पानी को टेबल पर डाला जाता है जहाँ होता यह है की पानी बह जाता है और सोने के अंश टेबल पर जमा रह जाते हैं l फिर इस जमा हुए सोने के कण से बिस्किट, ईंट, प्लेट और अन्य सामान बनाया जाता है।
  5. पहली रासायनिक प्रक्रिया : अगर अयस्क में सोने की मात्रा कम है तो सायनाइड रासायनिक प्रक्रिया का सहारा लिया जाता हैl  खान से निकले पत्थरों और इसके चूर्ण को कार्बन पल्स प्लांट में प्रोसेस करते हैं फिर इस पर पोटेशियम सायनाइड डालकर 48 घंटे तक छोड़ देते हैं l सायनाइड से रासायनिक प्रतिक्रिया करने के बाद मलबे में छिपा सोना तरल रूप में बाहर आ जाता है l
  6. दूसरी रासायनिक प्रक्रिया : स्वर्ण अयस्क से शुद्ध सोना हासिल करने के सभी तरीकों में सबसे पहले अयस्क को धोया जाता है और फिर उसे मिल भेज दिया जाता है। मिल में अयस्क को पानी के साथ छोटे-छोटे कणों में पीस लिया जाता है। इसके बाद अयस्क को पारे की परत चढ़ी हुई प्लेटों से होकर गुजारा जाता है। स्वर्ण और पारा मिलकर अमलगम बना लेते हैं। इस प्रक्रिया को अमलगमेशन कहा जाता है। एक बार अमलगम बन जाने के बाद इसे तब तक गर्म किया जाता है, जब तक कि पारा गैस बनकर उड़ नहीं जाता। इसके बाद सोना बचा रह जाता है जिसके बारे में हमने ऊपर विस्तारपूर्वक बताया था।
  7. तीसरी रासायनिक प्रक्रिया : सोना निकालने की तीसरी प्रक्रिया को फ्लोटेशन कहा जाता है। जमीन से निकले अयस्क को एक घोल में रखा जाता है जिसमें झाग बनाने वाले तत्वों के अलावा संग्राहक तत्व भी होते हैं और कुछ दूसरे केमिकल्स भी होते है । झाग बनाने वाला तत्व इस पूरे घोल को झाग में बदल देता है। और फिर संग्राहक तत्व सोने के कणों को आपस में बांधते हैं, जिससे एक तैलीय फिल्म बन जाती है जो सतह पर हवा के बुलबुलों से जुड़ जाती है। इसके बाद सोने की इस फिल्म को अलग कर लिया जाता है।
सोना कैसे बनता है पूरी जानकारी
अंत में पूरी प्रक्रिया के बाद कुछ ऊपर बताये गए स्क्रीनशॉट के अनुसार का शुद्ध सोना मिलता है। जिसे आगे चल कर झवेरी की व्यापारियों को दिया जाता है और फिर उसमे से विविध प्रकार के गहने और वस्तुए बनती है। सोना निकालने की प्रक्रिया इतनी ज्यादा कठिन होने की वजह से मार्किट में उसकी डिमांड और दाम दोनों ही ऊँचे रहते है। इसे आप गोल्ड बनाने का फार्मूला या मंत्र भी समझ सकते है।

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